स्पर्म काउंट कम होना पुरुषों में बांझपन के सबसे आम और इलाज योग्य कारणों में से एक है। कई मामलों में, एक बार मुख्य कारण का पता चल जाने पर इसमें सुधार किया जा सकता है या स्थिति को संभाला जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुष पिता नहीं बन सकता — इसका मतलब सिर्फ यह है कि स्वाभाविक रूप से गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है। सीमेन एनालिसिस (वीर्य विश्लेषण) और उसके बाद सही डॉक्टर से जांच कराना यह जानने का सबसे तेज़ तरीका है कि असल वजह क्या है और इसके लिए क्या किया जा सकता है।
कम स्पर्म काउंट किसे कहते हैं?
मानक संदर्भ मूल्यों के आधार पर, स्पर्म काउंट कम होने को, जिसे ऑलिगोस्पर्मिया कहा जाता है, आम तौर पर वीर्य के प्रति मिलीलीटर 15 मिलियन से कम स्पर्म के रूप में परिभाषित किया जाता है। प्रति मिलीलीटर 5 मिलियन से कम काउंट को आमतौर पर गंभीर ऑलिगोस्पर्मिया कहा जाता है, और वीर्य में स्पर्म का पूरी तरह से न होना एजूस्पर्मिया कहलाता है — यह एक अलग स्थिति है जिसके लिए विशेष जांच की आवश्यकता होती है।
स्पर्म काउंट सीमन एनालिसिस का केवल एक हिस्सा है। काउंट के साथ-साथ मोटिलिटी (स्पर्म कितनी अच्छी तरह चलते हैं) और मॉर्फोलॉजी (उनका आकार) का भी आकलन किया जाता है, क्योंकि किसी पुरुष का स्पर्म काउंट सामान्य हो सकता है लेकिन मोटिलिटी खराब हो सकती है, या इसके विपरीत हो सकता है, और दोनों ही प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना को प्रभावित करते हैं।
कम स्पर्म काउंट के आम कारण
कम स्पर्म काउंट का शायद ही कभी कोई एक अकेला कारण होता है। यह आमतौर पर निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक कारणों का परिणाम होता है:
- वैरिकोसील: अंडकोष में एक बढ़ी हुई नस (वेन), जो कम स्पर्म काउंट वाले पुरुषों के एक बड़े हिस्से में मौजूद होती है, और सर्जरी द्वारा ठीक होने वाला सबसे आम कारण है।
- हार्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरोन का कम होना या पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़े हार्मोन की अन्य समस्याएं स्पर्म के उत्पादन को कम कर सकती हैं, भले ही टेस्टिकल्स अपने आप में पूरी तरह स्वस्थ हों।
- संक्रमण: एपिडिडिमिस, अंडकोष (testicle) या प्रोस्टेट का पुराना या मौजूदा संक्रमण (जिसमें सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन भी शामिल हैं) स्पर्म के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है या स्पर्म के रास्ते को ब्लॉक कर सकता है।
- आनुवंशिक स्थितियां: क्لاینफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome) या वाई-क्रोमोज़ोम माइक्रोडिलीटेड (Y-chromosome microdeletions) जैसी स्थितियां स्पर्म (शुक्राणु) के उत्पादन को कम या खत्म कर सकती हैं। गंभीर मामलों में आमतौर इसकी पहचान आनुवंशिक जाँच (genetic testing) से होती है।
- संरचनात्मक रुकावटें: स्पर्म ले जाने वाली नलियों में रुकावट (चाहे संक्रमण, चोट या पहले हुई सर्जरी जैसे वैसेक्टॉमी के कारण हो) स्पर्म को वीर्य तक पहुँचने से रोकती है।
- अंडकोष के नीचे न उतरने का इतिहास: बचपन में जो अंडकोष ठीक से नीचे नहीं उतरा था, भले ही बाद में इसे ठीक कर लिया गया हो, वह लंबी अवधि के स्पर्म उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
- मेडिकल स्थितियां: मधुमेह (डाइबीटीज), मोटापा और कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां स्पर्म काउंट के कम होने से जुड़ी होती हैं।
- दवाइयां और उपचार: ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं, एनाबॉलिक स्टेरॉयड, लंबे समय तक ओपिऑइड्स (opioids) का सेवन, और कीमोथेरेपी या रेडिएशन जैसे कैंसर के इलाज स्पर्म काउंट को कम कर सकते हैं, जो कभी-कभी अस्थायी होता है।
- इजैक्यूलेशन (वीर्यपात) से जुड़ी समस्याएं: रेट्रोग्रेड इजैक्यूलेशन, जहां वीर्य सामान्य रूप से बाहर निकलने के बजाय ब्लैडर में चला जाता है, स्टैंडर्ड सीमेन सैंपल में बहुत कम या बिना स्पर्म काउंट के रूप में दिखाई दे सकता है।

वैरिकोसील: सर्जरी द्वारा ठीक होने वाला सबसे आम कारण
वैरिकोसील (Varicocele) अंडकोष की नसों का बढ़ जाना है, जो शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाली वैरिकोज़ नसों जैसा ही होता है। कम स्पर्म काउंट वाले मूल्यांकन किए जाने वाले पुरुषों में यह एक बड़े हिस्से में पाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह अंडकोष के आसपास का तापमान थोड़ा बढ़ाकर फर्टिलिटी को कम करता है, जिससे समय के साथ स्पर्म के उत्पादन पर असर पड़ता है।
हर वैरिकोसील (varicocele) के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं होती — कई पुरुषों में यह होता है और फर्टिलिटी पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। वैरिकोसेलेक्टॉमी (वैरिकोसील की सर्जरी) आमतौर पर तब की जाती है जब वैरिकोसील चिकित्सकीय रूप से गंभीर हो, सीमन (वीर्य) के पैरामीटर असामान्य हों और इनफर्टिलिटी का कोई अन्य बड़ा कारण समझ न आ रहा हो। सर्जरी के बाद ज्यादातर पुरुषों में सीमन की क्वालिटी में सुधार होता है, हालांकि इसमें कुछ महीने लग सकते हैं क्योंकि स्पर्म को पूरी तरह परिपक्व (mature) होने में लगभग तीन महीने का समय लगता है।
जीवनशैली और रोजमर्रा की वे बातें जो मायने रखती हैं
चिकित्सकीय कारणों के अलावा, कई रोजमर्रा के कारक भी स्पर्म काउंट को कम कर सकते हैं, और टेस्ट के परिणाम चाहे जो भी आएं, इन पर ध्यान देना फायदेमंद होता है।
- गर्मी के संपर्क में आना: बार-बार गर्म पानी से नहाना, सौना, सीधे गोद में रखकर लैपटॉप का उपयोग करना, और लंबे समय तक बैठने या गर्मी से जुड़े पेशे स्कॉटल का तापमान बढ़ा सकते हैं और स्पर्म के उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
- तंबाकू और शराब का सेवन: दोनों को लगातार कम स्पर्म काउंट और खराब स्पर्म मोटिलिटी से जोड़ा गया है।
- मोटीपा: शरीर का अतिरिक्त वजन ऐसे हार्मोनल बदलावों से जुड़ा होता है जो स्पर्म के उत्पादन को कम करते हैं।
- टाइट अंडरवियर और लंबे समय तक बैठना: इसके प्रमाण मिले-जुले हैं, लेकिन लंबे समय तक गर्मी बढ़ने से बचना एक उचित और कम खर्चीला एहतियात है।
- एनाबॉलिक स्टेरॉयड या टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट्स का उपयोग: ये शरीर के अपने स्पर्म उत्पादन को रोक सकते हैं, और दवा बंद करने के कई महीनों बाद तक भी ऐसा असर रह सकता है।
- क्रोनिक तनाव और खराब नींद: दोनों ही उन हार्मोन्स को प्रभावित करते हैं जो स्पर्म के उत्पादन को नियंत्रित करते हैं, हालांकि ये शायद ही कभी एकमात्र कारण होते हैं।
जांच कब करवाएं?
मानक सलाह यह है कि प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की कोशिश के 12 महीनों के बाद, या यदि आपकी पार्टनर की उम्र 35 वर्ष से अधिक है तो 6 महीनों के बाद मूल्यांकन करवाएं। हालांकि, कुछ स्थितियों में पूरे एक साल तक इंतजार करने के बजाय जल्दी मूल्यांकन करवाने की आवश्यकता होती है।
- वैरिकोसील (varicocele), अंडकोष का नीचे न उतरना (undescended testicle), या पहले कभी ग्रोइन/अंडकोष की सर्जरी होने का इतिहास
- प्यूबर्टी के बाद मम्प्स (गलसुवा) या किसी भी तरह के टेस्टिकुलर इन्फेक्शन का इतिहास
- गर्भधारण में कठिनाई के साथ-साथ बहुत कम कामेच्छा (libido), Erector dysfunction (इरेक्शन में कठिनाई), या वीर्य की मात्रा में कमी
- मधुमेह (डाइबीटीज), थायराइड विकार, या अन्य कोई हार्मोनल समस्या
- कीमोथेरेपी, रेडिएशन या लंबे समय तक स्टेरॉयड का पिछला इतिहास
- साथी (partner) की उम्र 35 वर्ष से अधिक होना, ऐसी स्थिति में दोनों साथियों के लिए आमतौर पर जल्द जांच करवाने की सलाह दी जाती है
पुरुषों में बांझपन (Infertility) के लिए परीक्षण
एक व्यवस्थित जांच से अंदाज़ा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और यह पता चलता है कि कारण हार्मोनल, शारीरिक (स्ट्रक्चरल), आनुवंशिक (जेनेटिक) या जीवनशैली से जुड़ा है या नहीं।
- वीर्य विश्लेषण (Semen analysis): स्पर्म काउंट, गतिशीलता (मोटिलिटी), बनावट (मॉर्फोलॉजी), मात्रा और पीएच (pH) की जांच के लिए आमतौर पर इसे दो बार किया जाता है।
- हार्मोन टेस्ट: यह देखने के लिए कि स्पर्म बनाने का सिग्नल सही से मिल रहा है या नहीं, टेस्टोस्टेरोन, FSH, LH और कभी-कभी प्रोलैक्टिन तथा थायराइड हार्मोन की जाँच की जाती है।
- स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड: वैरिकोसील, अंडकोष का नीचे न उतरना (undescended testicle), सिस्ट या संरचनात्मक असामान्यताओं की जांच करता है।
- पोस्ट-इजाकुलेटरी यूरिन टेस्ट: जब रेट्रोग्रेड इजेकुलेशन का संदेह हो तो इसका उपयोग किया जाता है।
- जेनेटिक टेस्टिंग: गंभीर ऑलिगोस्पर्मिया या एज़ूस्पर्मिया के मामलों में विचार किया जाता है।
- टेस्टिकुलर बायोप्सी: एज़ोस्पर्मिया में यह देखने के लिए चुनिंदा रूप से उपयोग किया जाता है कि स्पर्म का उत्पादन हो रहा है या नहीं लेकिन रास्ता बंद है।
उपचार के विकल्प
इलाज मूल्यांकन में पाए गए विशिष्ट कारण के अनुसार किया जाता है, न कि सामान्य रूप से सभी पर लागू किया जाता है।
- जीवनशैली में सुधार: गर्मी के संपर्क में आना कम करना, तंबाकू और स्टेरॉयड का सेवन बंद करना, वजन प्रबंधन, और शराब का सेवन सीमित करना।
- संक्रमण का इलाज: प्रोस्टेट, एपिडिडिमिस या टेस्टिस के सक्रिय संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स, जिसके बाद दोबारा सीमन एनालिसिस किया जाता है।
- हार्मोन थेरेपी: जब हार्मोन टेस्ट में कोई ऐसा पैटर्न दिखाई दे जिसका इलाज संभव हो, तो अंदरूनी हार्मोनल असंतुलन को ठीक किया जाता है।
- वैरिकोसेलेक्टॉमी: जब एक महत्वपूर्ण वैरिकोसील सीमन के असामान्य पैरामीटर में योगदान दे रहा हो, तो उसकी सर्जिकल मरम्मत।
- स्खलन (ejaculatory) से जुड़ी समस्याओं को ठीक करना: कारण के आधार पर दवाइयां या प्रोसीजर के विकल्प उपलब्ध हैं।
- सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल: रुकावट या एज़ोस्पर्मिया (वीर्य में शुक्राणु न होना) के मामलों में, कभी-कभी सीधे एपिडिडिमिस या अंडकोश से स्पर्म निकाला जा सकता है।
- असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक: फर्टिलिटी विशेषज्ञ के साथ IUI, IVF या ICSI जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
क्या कम स्पर्म काउंट में प्राकृतिक रूप से सुधार हो सकता है?
कुछ पुरुषों के मामले में हाँ — खासकर तब जब समस्या जीवनशैली से जुड़ी हो, जैसे कि अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहना, तंबाकू का सेवन, मोटापा, या हाल ही में हुआ कोई संक्रमण। चूंकि नए स्पर्म को पूरी तरह विकसित होने में लगभग तीन महीने का समय लगता है, इसलिए जीवनशैली में बदलाव या इलाज के बाद सुधार का आकलन आमतौर पर कम से कम 8 से 12 सप्ताह के बाद दोबारा सीमेन एनालिसिस (semen analysis) करवाकर किया जाता है, न कि कुछ दिनों या हफ़्तों में।
गंभीर वैरिकोसील (varicoसील), आनुवंशिक समस्याओं या रुकावट के मामलों में अकेले जीवनशैली में बदलाव करना काफी नहीं होता है। यही वजह है कि बिना किसी निदान के सीधे सप्लीमेंट्स या घरेलू नुस्खे आजमाने से बेहतर है कि उचित जाँच के जरिए असली कारण का पता लगाया जाए।
आपको यूरोलॉजिस्ट से परामर्श कब लेना चाहिए?
यदि आप बिना सफलता के एक वर्ष से गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं, या यदि इनमें से कोई भी लाल झंडा लागू होता है, या यदि वीर्य विश्लेषण ने पहले ही कम गिनती दिखाई है, तो आपको पुरुष बांझपन में प्रशिक्षित यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए।
गुड़गांव में पुरुष बांझपन विशेषज्ञ, कम स्पर्म काउंट के इलाज, या वैरिकोसील की जांच चाहने वाले पुरुष उरोवेलनेस क्लिनिक (Urowellness Clinic) में डॉ. विक्रम बरुआ कौशिक से परामर्श ले सकते हैं। डॉ. विक्रम यूरोलॉजिस्ट अवलोकन, चिकित्सा उपचार या सर्जिकल सुधार की सिफारिश करने से पहले वीर्य विश्लेषण रिपोर्ट, हार्मोन स्तर, अंडकोष के अल्ट्रासाउंड निष्कर्षों और जीवनशैली के कारकों की एक साथ समीक्षा करते हैं।
- 12 महीने तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण न होना, या यदि पार्टनर की उम्र 35 वर्ष से अधिक है तो 6 महीने बाद
- सीमेन एनालिसिस (वीर्य विश्लेषण) में पहले से ही कम काउंट, सुस्त गतिशीलता (पुअर मोटिलिटी), या असामान्य बनावट (एबनॉर्मल मॉर्फोलॉजी) दिखना
- वैरिकोसील (varicocele) की समस्या होना या इसके होने का संदेह
- बचपन में अंडकोष का नीचे न उतरना (undescended testicle), अंडकोष में चोट या संक्रमण का इतिहास
- बहुत कम या नगण्य वीर्य की मात्रा (Ejaculate volume)
- कीमोथेरेपी, रेडिएशन या लंबे समय तक स्टेरॉयड के उपयोग की योजना, जहाँ पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन (भविष्य के लिए प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखने) पर चर्चा की जानी चाहिए
मुख्य निष्कर्ष
स्पर्म काउंट का कम होना एक आम समस्या है, जिसका आमतौर पर एक स्पष्ट कारण होता है। सही दृष्टिकोण अपनाने पर इसका इलाज या प्रबंधन किया जा सकता है — लेकिन इसके लिए अंदाजे या बिना जांच वाले नुस्खों के बजाय 'सीमेन एनालिसिस' और विशेष मूल्यांकन की आवश्यकता होती है। कारण चाहे वैरिकोसील हो, हार्मोनल असंतुलन हो, कोई संक्रमण हो या जीवनशैली से जुड़ा कारक, यही बात तय करती है कि असल में क्या इलाज मददगार साबित होगा।
यदि आप और आपके पार्टनर गर्भधारण की कोशिश कर रहे हैं और सफलता नहीं मिल रही है, तो जाँच के आधार पर आगे की सही दिशा तय करने के लिए उरोवेलनेस क्लिनिक (Urowellness Clinic) में डॉ. विक्रम बरुआ कौशिक (Dr Vikram Barua Kaushik) से परामर्श बुक करें।
Resources
- पुरुष बांझपनयूरोलॉजी केयर फाउंडेशन
- ओलिगोस्पर्मिया (कम स्पर्म काउंट)क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाँ। शुक्राणुओं की कम संख्या गर्भधारण की संभावना को कम करती है लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त नहीं करती है। कम शुक्राणु संख्या वाले कई पुरुष भी स्वाभाविक रूप से पिता बनते हैं, खासकर तब जब शुक्राणु की गतिशीलता (मोटिलिटी) और बनावट (मॉर्फोलॉजी) सामान्य हो। इसका मतलब आमतौर पर यह होता है कि गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है या इसके मूल कारण का इलाज करने से मदद मिल सकती है।
